बीजेपी का इतिहास एवं विकास-

Share your love

भारत जनता पार्टी एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल है जो भारत को सुदृढ़ समृद्ध एवं शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए कृत संकल्प है। भारत को एक समर्थ राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ भाजपा का गठन 6 अप्रैल 1980 को नई दिल्ली के कोटका मैदान में आयोजित एक कार्यकर्ता अधिवेशन में किया गया।

जिसके प्रथम अध्यक्ष श्री अटल बिहारी बाजपेई निर्वाचित हुए। अपनी स्थापना के साथ ही भाजपा ने अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय लोक हित के विषयो पर मुखर रहते हुए भारतीय लोकतंत्र में अपनी सशक्त भागीदारी दर्ज की तथा भारतीय राजनीति को नए आयाम दिए कांग्रेसी की एकाधिकार वाली निर्दलीय लोकतांत्रिक संस्था के रूप में जानी जाने जाने वाली भारतीय राजनीति को भारतीय जनता पार्टी ने दो ध्रुवीय बना कर एक गठबंधन युग के सूत्रपात में अग्रणी भूमिका निभाई है।

देश में विकास आधारित राजनीति की नीव भी भाजपा ने अलग-अलग राज्यों में सत्ता में आने के बाद तथा पूरे देश में भाजपा नीत राजग शासन के दौरान रखी। आज तीन दशक बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसी एक पार्टी को देश की जनता ने पूर्ण बहुमत दिया है तथा भारी बहुमत से भाजपा नीत राजग सरकार केंद्र में विधमान है।

पृष्टि भूमि–

हालांकि भारतीय जनता पार्टी का गठन 6 अप्रैल 1980 को हुआ, परंतु इसका इतिहास भारतीय जनसंघ से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता प्राप्ति तथा देश विभाजन के साथ ही देश में एक नई राजनीतिक परिस्थितियां उत्पन्न हुई गांधी जी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाकर देश में एक नया राजनीतिक षड्यंत्र रचा जाने लगा।

सरदार पटेल के मरने के तहत कांग्रेस में नेहरू का अधिनायकवाद प्रबल होने लगा। गांधी और पटेल दोनों के ही नहीं रहने के कारण कांग्रेस ‘नेहरूवाद’ की चपेट में आ गई तथा अल्पसंख्यक तृष्टिकरण लाइसेंस ,परमिट, कोटा राज, राष्ट्रीय सुरक्षा पर लापरवाही, राष्ट्रीय मसलो जैसे कश्मीर आदि पर घुटनाटेक नीति, अंतरराष्ट्रीय मामलों मे भारतीय हितो की अनदेखी आदि अनेक विषय देश में राष्ट्रवादी नागरिकों को उद्विग्न करने लगे।

‘नेहरूवाद’ तथा पाकिस्तान एवं बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर भारत के चुप रहने से क्षुब्ध होकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया।

इधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ स्वयंसेवको ने भी प्रतिबंध के दंश को झेलते हुए महसूस किया कि संघ के राजनीतिक क्षेत्र से सिद्धांतत: दूरी बनाए रखने के कारण वे अलग- भलग तो पड़े ही साथ ही संघ को राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा था।

ऐसी परिस्थितियों में एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल की आवश्यकता देश में महसूस की जाने लगी।फलतः भारतीय जनसंघ की स्थापना 21अक्टूबर 1951 को डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अध्यक्षता दिल्ली के राघोमल आर्य कन्या उच्च विद्यालय में हुई।

भारतीय जनसंघ ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में कश्मीर एवं राष्ट्रीय अखंडता के मुद्दे पर आंदोलन छेड़ा तथा कश्मीर को किसी भी प्रकार का विशेषाधिकार देने का विरोध किया।

नेहरू के अधिनायकवादी रवैया के फलस्वरूप डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कश्मीर की जेल में डाल दिया गया, जहां उनकी रहस्यमय स्थिति में मृत हो गई। एक नई पार्टी को सशक्त बनाने का कार्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय के कंधों पर आ गया।

भारत – चीन युद्ध में भी भारतीय जनसंघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा राष्ट्रीय सुरक्षा पर नेहरू थी डटकर विरोध किया ।1967 में पहली बार भारतीय जनसंघ एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नेतृत्व में भारतीय राजनीति पर लंबे समय से बरकरार कांग्रेस का एकाधिकार टूटा, जिससे कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय हुई।

भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय–

70 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के नेतृत्व में निरंकुश होती जा रही काग्रेस सरकार के विरुद्ध देश में जन- असंतोस उभरने लगा। गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन के साथ बिहार में छात्र आंदोलन शुरू हो गया। कांग्रेस ने इन आंदोलन के दमन का रास्ता अपनाया।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने आंदोलन का नेतृत्व स्वीकार किया तथा देश भर में कांग्रेस शासन के विरुद्ध जन असंतोष मुखर हो उठा। 1971 में देश पर भारत-पाक युद्ध तथा बांग्लादेश ने विद्रोह परीप्रेक्ष्य में बह्या लगाया गया था जो युद्ध समाप्ति के बाद भी लागू था।

उसे हटाने की मांग तीव्र होने लगी। जन आंदोलन से घबराकर इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार ने जनता की आवाज को दमनचक्र से कुचलने का प्रयास किया। परिणामतः 25 जून 1975 को देश पर दूसरी बार आपातकाल भारतीय संविधान की धारा 3 52 के तहत ‘आंतरिक आपातकाल’ के रुप में थोप दिया गया। देश के सभी बड़े नेता या तो नजर बंद कर दिए गए अथवा जेलों में डाल दिए गए। समाचार पत्रों पर ‘सेंसर’ लगा दिया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अनेक राष्ट्रवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

हजारो कार्यकर्ताओ को ‘मीसा’ के तहत गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। देश में लोकतंत्र पर खतरा मंडराने लगा। जनसंघर्ष को तेज किया जाने लगा और भूमिगत गतिविधियां भी तेज हो गई।

तेज होते जनान्दोलन से घबराकर इंदिरा गांधी ने 18 जनवरी 1977 को लोकसभा भंग कर दी तथा नये जनादेश प्राप्त करने की इच्छा व्यक्त की तथा जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर एक नए राष्ट्रीय दल ‘जनता पार्टी’ का गठन किया गया। विपक्षी दल एक मंच से चुनाव लड़े तथा चुनाव में कम समय होने के कारण जनता पार्टी का गठन पूरी तरह से राजनीतिक दल के रूप में नहीं हो पाया।

आम चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई तथा ‘जनता पार्टी’ एवं दुसरे विपक्षी पार्टियां भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई।

भाजपा का गठन–
जनता पार्टी का प्रयोग अधिक दिनों तक नहीं चल पाया। तीन वर्षों में ही अंतर्विरोध सतह पर आने लगा। कांग्रेस ने भी जनता पार्टी को तोड़ने में राजनीतिक दाव-पेचं से परहेज नहीं किया। भारतीय जनसंघ से जनता पार्टी में आए सदस्यों को अलग अलग करने के लिए ‘दोहरी सदस्यता’ का मामला उठाया गया।

स्वयंसेवक संघ से संबंध रखने पर आपत्तियां उठाई जाने लगी। यह कहा गया कि जनता पार्टी के सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य नहीं बन सकते। 4 अप्रैल 1980 को जनता पार्टी की कार्यसमिति ने अपने सदस्यों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य होने पर प्रतिबंध लगा दिया।

पूर्व के भारतीय जनसंघ से संबंधित सदस्यो ने इसका विरोध किया और जनता पार्टी से अलग होकर 6 अप्रैल 1980 को नए संगठन ‘भारतीय जनता पार्टी’ की घोषणा की। इस प्रकार भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई।

विचार एवं दर्शन–

भारतीय जनता पार्टी एक सुदृढ़ सशक्त समृद्ध समर्थ एवं स्वावलम्बी भारत के निर्मात हेतु निरंतर सक्रिय हैं। पार्टी की कल्पना एक ऐसी राष्ट्र की है जो आधुनिक दृष्टिकोण से युक्त एक प्रगतिशील एवं प्रबुद्ध का प्रतिनिधित्व करता तथा प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति तथा उसके मूल्यों से ज्ञान लेते हुए महान ‘विश्वशक्ति’ एवं ‘विश्व गुरु’ के रूप में विश्व पटल पर स्थापित हो। इसके साथ ही विश्व शांति तथा न्याय युक्त अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को स्थापित करने के लिए विश्व के राष्ट्रों को खुश करने की हिम्मत रखें।

भाजपा भारतीय संविधान में निहितमूल्यो तथा सिद्धांतो के प्रति निष्ठा पूर्वक कार्य करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आधारित राज्य को अपना आधार मानती है।

पार्टी का लक्ष्य एक एसे लोकतांत्रिक राज्य की स्थापना करना है जिसमें जाति संप्रदाय अथवा लिंगभेद के बिना सभी नागरिकों को राजनीतिक, सामाजिक एवं,आय न्याय, समान अवसर तथा धार्मिक विश्वास एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो।

भाजपा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ,एकात्म मानव, लर्शन दर्शन को अपने वैचारिक दर्शन के रूप में अपनाया है। साथ ही पार्टी का अंत्योदय सुशासन सास्कृतिक राष्ट्रवाद विकास एवं सुरक्षा पर भी विशेष जोर है।

पार्टी ने पांच प्रमुख सिद्धांतों के प्रति भी अपनी निष्ठा व्यक्त की, जिन्हें ‘पंच निष्ठा’ कहते हैं। ये पांच सिद्धांत (पंचनिष्ठा)है। राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय अखंडता, लोकतंत्र सकारात्मक पंथनिरपेक्षता (सर्वधर्मसमभाव) गांधी वादी समाजवाद (सामाजिक-आय विषयों पर गांधीवादी दृष्टिकोण द्वारा शोषण मुक्त समरस समाज की स्थापना) तथा मूल्य आधारित राजनीति।

उपलब्धियां–

श्री अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित हुए अपनी सभ्यता के साथ ही भाजपा राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गई। बोफोर्स एवं भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पुनः गैर कांग्रेसी दल एक मंच पर आए तथा 1989 के आम चुनावो में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस को भारी हार का सामना करना पड़ा।

बी. पी. सिंह के नेतृत्व में गठित राष्ट्रीय मोर्चे की सरकार को भाजपा ने बाहर से समर्थन दिया। इसी बीच देश में राम मंदिर के लिए आंदोलन शुरू हुआ। तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष श्री लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए रथ यात्रा शुरू किया।

राम मंदिर आंदोलन को मिली भारी जन समर्थन एवं भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर आडवाणी जी ने रथयात्रा को बीच में ही रोक दिया।फलतः भाजपा ने राष्ट्रीय मोर्चा सरकार से समर्थन वापस ले लिया। और वी. पी. सिंह सरकार गिर गई तथा कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर देश के अगले प्रधानमंत्री बने।

आने वाले आम चुनाव में भाजपा का जन समर्थन लगातार बढ़ता गया। इसी बीच नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कांग्रेस तथा कांग्रेस से संयुक्त मोर्चे की सरकारो का शासन देश पर रहा, जिस दौरान भ्रष्टाचार,अराजकता एवं कुशासन की कई कीर्तिमान स्थापित हुए।

1996 के आम चुनावो में भाजपा को लोकसभा में 161 सीटें प्राप्त हुई। भाजपा ने लोकसभा1989 में 85, सीटे 1991 मे 120 तथा 1996 में से 161 सीटें प्राप्त की। भाजपा का जन समर्थन लगातार बढ़ रहा था।

श्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में पहली बार भाजपा सरकार ने 1996 में शपथ ली, परंतु पर्याप्त समर्थन के अभाव में यह सरकार मात्र 13 दिन ही चल पाई। इसके बाद 1998 के आम चुनाव में भाजपा ने 182 सीटों पर जीत दर्ज की और श्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने शपथ ली।

परंतु जयललिता के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के कारण सरकार लोकसभा में विश्वासमत के दौरान एक वोट से गिर गई, जिसके पीछे वह अनैतिक आचरण था जिसमें उड़ीसा के तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री गिरिधर गोमांग ने पद पर रहते हुए भी लोकसभा के सदस्यता नहीं छोड़ी तथा विश्वासमत के दौरान सरकार के विरुद्ध मतदान किया।

कांग्रेस के इस अवैध और अनैतिक आरक्षण के कारण देश को पुनः आम चुनावो का सामना करना पड़ा। 1999 में भाजपा 182 सीटों पर पुनः विजय मिली तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 306 सीटें प्राप्त हुई। एक बार पुनः श्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में भाजपा – नीत राजग की सरकार बनी।

भाजपा- नीत राजग सरकार ने श्री अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में विकास के कई नए प्रतिमान स्थापित किये। पोरवरण परमाणु विस्फोट, अग्नि मिसाइल का सफल प्रक्षेपण, कारगिल विजय जैसी सफलताओं से भारत का पद अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर उंचा हुआ। राष्ट्रीय राजमार्गो का निर्माण सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार, शिक्षा एवं व्यवस्था में नयी पहल एवं प्रयोग कृषि विज्ञान एवं उद्दोंग के क्षेत्रों में तीव्र विकास के साथ-साथ महंगाई न बढ़ने देने जैसी अनेको उपलब्धियां इस सरकार के खाते में दर्ज है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों को सुधारने देश की आंतरिक समस्याओं जैसे नक्सलवाद, आतंकवाद, जम्मू एवं कश्मीर तथा उत्तर पूर्व के राज्यों में अलगाववाद पर कई प्रभावी कदम उठाए गए।राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को सुदृढ़ कर सुशासन एवं सुरक्षा को केन्द्र में रखकर देश को समृद्ध एवं समर्थ बनाने की दिशा में अनेक निर्णायक कदम उठाया गए।

तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई एवं उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में राजग शासन ने देश में विकास की एक नई राजनीतिक का सूत्रपात किया।

समान स्थिति-
आज भाजपा देश में एक प्रमुख राष्ट्रवादी शक्ति के रूप में उभर चुकी है। एवं देश के सुशासन विकास एकता एवं अखंडता के लिए कृतसंकल्प है।

10 साल पार्टी ने विपक्ष की सक्रिया और शानदार भूमिका निभाई। 2014 में श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत के साथ बनी, जो आज सबका विकास की उद्घोषणा के साथ गौरव संपन्न भारत का पुनर्निर्माण रही हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा लगभग 11 करोड़ सदस्यों वाली विश्व की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी बन गई है।

26 मई 2014 को श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की। मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने कम समय में ही अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की है।

उन्होंने भी साथ भारत की गरिमा को पुनः स्थापित किया। अनेक अभिनय योजनाओं के माध्यम से नए युग की शुरुआत की। अंत्योदय, शुसास, विकास एवं समृद्धि के रास्ते पर देश बढ़ चला है। आर्थिक और सामाजिक सुधार सुरक्षित जीवन जीने का मार्ग उपलब्ध करा रहे हैं।

किसानों के लिए ऋण से लेकर खातों की नई नीतिया जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, साँयल हेल्थ कार्ड आदि ने कृषि के तीव्र विकास की अलख जगाई है।

यह नियम है सुशासन का। चाहे आदर्श ग्राम योजना हो, स्वच्छता अभियान या फिर योग के सहारे भारत को स्वस्थ बनाने का अभियान, इन सभी कदमों से देश को एक नई ऊर्जा मिली है। भाजपा की मोदी सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ (स्किल इंडिया) अमृत मिशन दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना, डिजिटल इंडिया,।

जन- धन योजना बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ सुकन्या समृद्धि योजना जैसी अनेक योजनाएं देश में एक नई क्रांति का सूत्रपात कर रही है।

भारतीय राजनीति में भाजपा का योगदान–

राष्ट्रीय अखंडता कश्मीर के भारत में पूर्ण विलय, कबाइली देश में पाकिस्तानी आक्रमण के प्रतिकार परमिट व्यवस्था एवं धारा 370 की समाप्ति और पृथक वाद से निरंतर संघर्ष करने वाली एक मात्र पार्टी भारतीय जनसंघ या भाजपा हैं अन्यथा कश्मीर का बचना कठिन था।

आज भी देश में राष्ट्रीय अखण्डता के मुद्दे उठाना पृथक वाद से जूझना एवं इस निमित समाज को निरन्तर जाग्रत रखने का काम भाजपा ही कर रही हैं।

देश को परमाणु शक्ति सम्पन्न कर भारत पर हमलो की हिमाकत करने वालो को अटलजी की सरकार ने सीधा संदेश दिया।

Share your love
Default image
Suman Kushwaha
Articles: 11

Newsletter Updates

Enter your email address below to subscribe to our newsletter

Leave a Reply